अक्टूबर माह के लिए कृषि सलाह

 किसान भाइयो

नमस्कार,

इण्डोगल्फ क्रॉप साइंसेज लिमिटेड आपका हार्दिक स्वागत करता है, कृषि परामर्श सेवाओं में कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

Ø  अगेती रबी फसलों की तैयारी के लिए खेत की जुताई करने के तुरंत बाद पाटा अवश्य लगाएं ताकि मिट्टी से नमी का ह्रास न हो।

Ø  रबी की फसलों की बुवाई से पहले किसान अपने-अपने खेतों को अच्छी प्रकार से साफ-सुथरा करें। मेड़ोंनालोंखेत के रास्तों तथा खाली खेतों को साफ-सुथरा करें ताकि कीटों के अंडे, रोगों के कारक नष्ट हो सके तथा खेत में सड़े गोबर की खाद का उपयोग करें क्योंकि यह मृदा के भौतिक तथा जैविक गुणों को सुधारती है तथा मृदा की जल धारण क्षमता भी बढ़ाती है।

Ø   मौसम की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए किसान सरसों की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा तारक, पूसा महक।बीज दर–1.5-2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड। बुवाई से पहले खेत में नमी के स्तर को अवश्य ज्ञात कर ले ताकि अंकुरण प्रभावित न हो। बुवाई से पहले बीजों को  श्रीलैक्सिल-35 डब्लू पी (metaxyl-35WP) @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. व् बायो गोल्ड @ 2 .0 ग्राम प्रति कि.ग्रा.  बीज की दर से उपचार करें। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कम फैलने वाली किस्मों की बुवाई 30 सें. मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों की बुवाई 45-50 सें.मी. दूरी पर बनी पंक्तियों में करें। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सें.मी. कर ले। मिट्टी जांच के बाद यदि गंधक की कमी हो तो 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से जिंक सुपर गोल्ड अंतिम जुताई पर डालें।

Ø  इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में - पूसा रूधिरापूसा असिता। बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को श्रीलैक्सिल-35 डब्लू पी (metaxlyl-35WP) @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. व् बायो गोल्ड @ 2 .0 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में गोबर की खादपोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें। गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।

Ø   इस समय फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः किसान फसल की निगरानी करें यदि प्रकोप दिखाई दे तो  स्पाइन (बाईफेनथ्रिन 10 प्रतिशत ई सी ) @ 1.0-1.5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी या एल ड्रिन्ट/ रसबान-20 ई सी (क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी ) @ 4.0 मि.ली/लीटर सिंचाई  जल के साथ दे।

Ø  इस मौसम में धान में आभासी कंड (False Smut) आने की काफी संभावना है। इस बीमारी के आने से धान के दाने आकार में फूल जाते है। इसकी रोकथाम के लिए टैंगो सुपर (डाईफेनकोनाज़ोल 13 .9 प्रतिशत + प्रोपिकोनाज़ोल 13 .9 प्रतिशत ई सी) @ 2 .0 मिली लीटर पानी या  रिमोट पावर (70  प्रतिशत केप्टान+ हेक्साकोनाज़ोल 5  प्रतिशत डब्लू पी) @ 2 .0 ग्राम प्रति लीटर पानी या श्रीजोल 25 ई सी (प्रोपिकोनाज़ोल 25 ई सी ) @ 1 .0 मिली लीटर पानी या नेक्टर प्लस 5  प्रतिशत एस सी (हेक्साकोनाज़ोल 5  प्रतिशत एस सी) @ 1 .0 मिली लीटर पानी की दर से आवश्यकतानुसार पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें।

Ø  इस मौसम में किसान अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। यदि फसलों व सब्जियों में सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई दें तो सितारा 25  प्रतिशत डब्लू जी (थायमीथोजाम -25 डब्लू जी) @ 1.5- 2.0 ग्रा. प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

Ø   सब्जियों (मिर्चबैंगन) में यदि फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी  पत्तागोभी में डायमंड़ बेक मोथ की निगरानी के लिए फीरोमोन प्रपंच 4-6 प्रति एकड़ की दर से लगाए तथा प्रकोप अधिक हो तो डॉमिनेटर 5  प्रतिशत एस जी (इमामेक्टिन बेन्ज़ोएट 5  प्रतिशत एस जी) 1.0 ग्रा. प्रति 4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

Ø  कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (Malathion 0.1 %) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।

Ø  अगेती आलू की बुवाई से किसानों को अधिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है, क्योंकि यह फसल 60-90 दिन में तैयार हो जाती है। उन्नत किस्म- कुफरी सुर्या, इसके बाद रबी की कोई अन्य फसल जैसे पछेता गेहूँ को लिया जा सकता है। बुवाई से पूर्व बीज को स्पाइन ( बाईफेनथ्रिन 10 प्रतिशत ई सी ) @ 1.0-1.5 मिली लीटर प्रति किलोग्राम या ल-डरिनट / रसबान-20 ई सी (क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी ) @ 7.0-8.0 मि.ली/ किलो ग्राम या सवेरा 35 एफ़ एस (थायोमेथोक्ज़ाम -35 FS ) @ 7 - 8 ग्राम प्रति किलो ग्राम व् बायो गोल्ड @ 2 .0 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें

Ø  .मिर्च तथा टमाटर के खेतों में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। यदि प्रकोप अधिक है तो सितारा 25  प्रतिशत डब्लू जी (थायोमेथोक्ज़ाम -25 डब्लू जी) @ 1.5- 2.0 ग्रा. प्रति 10 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें ।

Ø  भिंड़ी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड़ और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर आलीशान सुपर (प्लांट एक्सट्रेक्ट) @ 2.5-3.0 मि.ली.लीटर पानी तथा जैसिड़ और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोरस (डाईमेथोयट 30 प्रतिशत ई सी) कीटनाशक 2 मि.ली.लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

Ø  गेंदे की नई फसल की रोपाई के लिए यह मौसम अनुकूल है।

Ø  छिडकाव या बीज उपचार के घोल में अंकुर गोल्ड @ १ मि.ली प्रति ३ ली. जल के साथ अवश्य प्रयोग करें.

डा देवा राम बाजया

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक

 

 


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